इन लेडी अफसरों से खौफ खाते हैं गुंडे, असम के जंगलों में लेकर घूमती हैं AK-47
देश में महिला पुलिस अफसरों की संख्या कुल पुलिस का 6.11 फीसदी ही है। भले ही इनकी संख्या कम है, लेकिन इनमें दम है। अनेकों मामलों में महिला पुलिस अफसरों की दबंगई जगजाहिर हुई है।
नई दिल्ली. बीते सप्ताह हरियाणा की आईपीएस अफसर संगीता कालिया का एक मंत्री से विवाद चर्चा में रहा। यह पहला मौका नहीं था, ऐसा कई बार हो चुका है जब नियमों के विरुद्ध, गंदी राजनीति के सामने महिला अधिकारियों ने घुटने नहीं टेके। देश के लिए पुरुषों से भी बेहतर कर सकती हैं महिलाएं, इस बात को साबित कर रही देश की महिला पुलिस अधिकारी।
देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी हो या असम में बोडो उग्रवादियों से लोहा ले रही संजुक्ता पाराशर इसका सशक्त उदाहरण हैं। भारत की पुलिस में राज्य स्तर पर पहली महिला की नियुक्ति साल 1933 और आईपीएस स्तर पर 1972 में हुई थी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 तक पुलिस में 33 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती का लक्ष्य रखा है।
विवाद और कार्रवाई
संगीता कालिया का विवाद के बाद तबादला कर दिया गया। इससे पहले भी कुछ आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को अच्छे काम के चलते कार्रवाई झेलनी पड़ी है।
ये हैं इंडिया की बहादुर लेडी अफसर
संजुक्ता पाराशर
असम की महिला आईपीएस ऑफिसर संजुक्ता पाराशर बहादुरी का दूसरा नाम हैं। इस वक्त वे राज्य के सोनितपुर में बतौर एसपी तैनात हैं। असम के जंगलों में पाराशर रात में भी एके-47 लेकर घूमती हैं।

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