दुनिया में चरमपंथ का ख़तरा तेज़ी से बढ़ रहा है. साल 2014 में चरमपंथी हमलों में मारे जाने वाले लोगों की संख्या पिछले साल से 80 प्रतिशत बढ़ गई.
साल 2013 में चरपमंथी हमले में कुल 18,111 मौतें हुई थीं जो 2014 में 32,685 पर पहुंच गईं. यह अभी तक चरमपंथी हमलों से मौतों की सबसे बड़ी संख्या है.
इनमें 78 प्रतिशत से अधिक मात्र पांच देशों इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, नाईजीरिया, पाकिस्तान और सीरिया में हुई हैं.
यह आंकड़े एक स्वतंत्र एजेंसी इंस्टीच्यूट फ़ॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस की चरमपंथ पर रिपोर्ट ग्लोबल टेररिज़्म इंडेक्ट 2015 के हैं. चरमपंथ प्रभावित देशों की एक सूची में भारत छठे स्थान पर है.
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ग्लोबल टेररिज़्म इंडेक्स की इस रिपोर्ट में अमरीका 35वें और हाल में ही आईएस हमले का शिकार हुआ फ्रांस 36वें नंबर पर है. आईएस के ख़िलाफ़ हवाई हमला करने वाला रूस 23वें स्थान पर है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ आईएस और बोको हराम सबसे ख़तरनाक चरमपंथी समूह बन गए हैं. चरमपंथी हमलों में सबसे ज़्यादा आम लोगों के निशाना बनाया जा रहा है.
इस रिपोर्ट में आतंकवाद के फैलने, उसके कारण, उसके प्रभाव और नतीजों की पड़ताल की गई है.
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रिपोर्ट के अनुसार हालांकि चरमपंथ कम ही देशों में केंद्रित है लेकिन चरमपंथी हमले झेलने वाले देशों की संख्या भी बढ़ रही है.
साल 2014 में चरमपंथ ने पहले से अधिक देशों को प्रभावित किया. 2013 में 88 के मुक़ाबले 2014 में 93 देशों में हमले दर्ज किए गए.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ में दो चरणों में चरमपंथ ने अपने पैर फैलाए. पहले 2007 में अमरीकी सेना के दख़ल के बाद दूसरी बार 2013 में कट्टरपंथियों और आईएस की गतिविधियां बढ़ने के बाद.
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उत्तरी नाइजीरया के इस्लामिक चरमपंथी समूह बोको हराम बेहद ख़तरनाक माने जाते हैं. बोको हराम ने 2014 में नाईजीरिया में 6,118 लोगों की हत्या कर दी.
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबानी चरमपंथ का सबसे ज़्यादा प्रभाव है. 2014 में 38 फीसदी आतंकवादी हमले के ज़िम्मेदार तालिबानी है.
पाकिस्तान में 2013 के मुक़ाबले 2014 में चरमपंथी घटनाओं में मारे जाने वालों की संख्या में 25 फीसदी की कमी आई है लेकिन फिर भी पाकिस्तान चौथे नंबर पर बना हुआ है.
पाकिस्तान में 2014 में 1,760 लोग मारे गए. पाकिस्तान में अभी 36 अलग-अलग चरमपंथी समूह हैं लेेकिन प्रभाव तालिबानी चरमपंथियों का अधिक है.
सीरिया में इस्लामिक स्टेट को चरमपंथ के लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार बताया जा रहा है.
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रिपोर्ट में पश्चिम देशों में 'लोन वुल्फ़' हमलों के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला गया है. 2006 से 'लोन वुल्फ़' हमले में पश्चिम में 70 प्रतिशत लोग मारे गए.
इन हमलों के लिए केवल इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी ही नहीं बल्कि इसके दक्षिणपंथी अतिवादियों, राष्ट्रवादियों, सरकार विरोधी तत्वों, राजनीतिक अतिवाद भी ज़िम्मेदार है.
अमरीका पर हुए हमलों को छोड़ दें तो 2000 से 2014 तक पश्चिमी देशों में चरमपंथ से 0.5 फ़ीसदी लोग मारे गए.
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