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पेरिस हमले के बाद मुसलमानों में डर

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शुक्रवार रात फ़्रांस की राजधानी पेरिस में दूसरे विश्व युद्ध के बाद से सबसे बड़ा हमला हुआ जिसमें अभी तक 129 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है.
हमलों के बाद पेरिस के आम लोग डर और सदमे में हैं. ये डर यहां की अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी में ज़्यादा है.
पेरिस में हमला
आम मुसलमानों में ये आशंका है कि आक्रोशित लोग उन पर जवाबी हमला कर सकते हैं.
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लेकिन फ़्रांस का एक इतिहास ये भी है कि यहां सदियों से ईसाई, मुसलमान और यहूदी मिलकर रह रहे हैं और यहां धर्मनिरपेक्षता बहुत मज़बूत है.
ऐसा ही डर का माहौल जनवरी में शार्ली हेब्दो के दफ़्तर पर हुए हमले के बाद भी था. लेकिन तब कोई अप्रिय घटना नहीं हुई थी और फ़्रांस का समाज एकजुट था.
यहां प्रशासन ज़ोर देकर इस बात को कह रहा है कि ऐसी किसी भी घटना को रोका जाएगा लेकिन यहां के मुसलमानों में ज़रूर प्रतिक्रियाओं का डर है.
मैं जिस टेक्सी से आ रहा था उसके मुसलमान ड्राइवर ने कहा, "हो सकता है रात में कोई घटना हो जाए."
हालांकि उसने यह भी कहा कि यहां के समाज में आपसी सौहार्द बहुत ज़्यादा है.
पेरिस में हमलाImage copPA
मैं शहर के मुख्य चौक से होकर गुज़रा जहां मारे गए लोगों की याद में शमा रोशन की जा रही थी.
मातम मनाने वालों में फ़्रांस के समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल थे. उनमें मुसलमान भी थी और अश्वेत भी. यहां लोग एकजुट हैं.
लोग यहां प्यार और मोहब्बत से रहते रहे हैं लेकिन हमला इतना बड़ी है कि आपसी सौहार्दे का बावजूद मुसलमानों के ख़िलाफ़ प्रतिक्रिया का ख़तरा है.
पेरिस हमलाImage copyrigh
माना यह भी जा रहा है कि हमलावर या सीरिया से आए थे या प्रवासी थे. ऐसे में ये ख़तरा और ज़्यादा महसूस किया जा रहा है.
फ़्रांस में पिछले कुछ सालों से कट्टरपंथी पार्टियां मज़बूत हो रही हैं.
ख़ासकर ले पेन की दक्षिणपंथी पार्टी खुले तौर पर मुसलमानों और प्रवासियों के ख़िलाफ़ है.
ले पेन की पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता को फ़्रांस की धर्म निरपेक्षता के लिए एक बड़ा ख़तरा माना जा रहा है.
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