स्त्रीणां दि्वगुण आहारो बुदि्धस्तासां चतुर्गुणा।
साहसं षड्गुणं चैव कामोऽष्टगुण उच्यते।।
अर्थ: एक स्त्री पुरूष की अपेक्षा दुगुना आहार लेती है, चार गुणा बुद्धिमान और चालाक होती है, छह गुणा साहसी होती है और उसमें कामेच्छा (सेक्स करने की इच्छा) पुरूष से आठ गुणा होती है। यही कारण है कि स्त्री पुरूष को सदैव परास्त कर देती है।
चाणक्य नीतिः राष्ट्रहित तथा धार्मिक रीति रिवाज
अन्नहीनो दहेद् राष्ट्रं मन्त्रहीनश्च ऋत्विज:।
यजमानं दानहीनो नास्ति यज्ञसमो रिपु:।।
अर्थ: जिस देश में लोग भूखमरी का सामना कर रहे हो वहां हवन करने में घी तथा अन्न को जलाना राष्ट्रद्रोह के समान है। ऎसे हवन को करने वाले ब्राह्मण तथा आयोजक दोनों ही मंत्रों की शुद्ध भावना और पूजा के शुद्ध उद्देश्य को अपवित्र करते हैं। अर्थात उन्हें सबसे पहले भूखों को खाना खिलाकर दरिद्रनारायण रूप भगवान को तृप्त करना चाहिए।
णक्य नीतिः देखने के तीन नजरिए
एक एवं पदार्थस्तु त्रिधा भवति वीक्षित:।
कुणप: कामिनी मांसं योगिभि: कामिभि: श्वभि:।।
अर्थ: किसी भी चीज को देखने के कई नजरिए होते हैं। हर आदमी दूसरे को स्वयं के नजरिए से देखना पसंद करता है। उदाहरण के लिए एक सुंदर स्त्री। एक सच्चे योगी, साधु के लिए वह एक मुर्दे के समान है जिसका कोई उपयोग नहीं है। एक कामी पुरूष के लिए वह इच्छापूर्ति का साधन है जिससे वह अपनी काम पीड़ा तथा वासना को तृप्त कर सकता है। परन्तु एक कुत्ते (या हिंसक जीव) के लिए वह न तो मुर्दा और न ही इच्छापूर्ति का साधन, बल्कि मांस के टुकड़ों के रूप में उसका भोजन है।
चाणक्य नीतिः सीधे और सरल मत बनो
नाऽत्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम्।
छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपा:।।
अर्थ: आदमी को कभी भी सीधा और सरल नहीं होना चाहिए। जंगल में जो पेड़ सीधे, चिकने होते हैं और जिन्हें काटने में कठिनाई नहीं होती, उन्हें ही सबसे पहले काटा जाता है।


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