पिता को मृत बताकर इकलौते बेटे ने तहसील कर्मियों की मिलीभगत से जमीन अपने नाम करा ली। पांच माह से पिता यामीन जिंदा होने की गुहार आला अफसरों से लगाकर थक चुका है, लेकिन न्याय नहीं मिला। निराश पिता ने अब सीजेएम कोर्ट में पुख्ता तथ्यों के साथ खुद को जिंदा साबित करने की याचिका दाखिल की है।
झूठे दस्तावेजों के आधार पर जीवित पिता को मृत बताकर जमीन हड़पने का यह मामला शामली से जुड़ा है। तहसील कैराना के गांव भूरा निवासी यामीन पुत्र लीमुदीन के इकलौत बेटे साजिद ने कैराना तहसील में पिता की मृत्यु के दस्तावेज दाखिल किए, ताकि पैतृक जमीन उसके नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दी जाए। तहसील की जांच प्रक्रिया में आंखों पर पट्टी बांध ली गई।
हलका लेखपाल मनोज कुमार ने यामीन को मृत दर्शा दिया और नायब तहसीलदार मदनलाल राठौर के आदेश पर आठ जुलाई को 18 बीघा भूमि साजिद के नाम रिकार्ड में दर्ज कर दी गई। खुलासा तब हुआ, जब 17 अक्तूबर को बैंक कर्मी साजिद द्वारा भूमि पर लोन लिए जाने की जांच के लिए गांव पहुंचे। यामीन को फर्जीवाडे की जानकारी मिली तो उसके होश उड़ गए।
बीते पांच माह में पिता शामली के डीएम, एसएसपी और कैराना तहसीलदार को सबूतों के साथ खुद के जिंदा होने की जानकारी दे चुका है, लेकिन कोई जांच को तैयार नहीं है। इकलौते बेटे की साजिश से निराश यामीन ने अब सीजेएम कोर्ट मुजफ्फरनगर में न्याय के लिए वाद दायर किया है।
अधिवक्ता मनोज सौदाई के मुताबिक मुकदमे में पुत्र साजिद के साथ नायब तहसीलदार मदनलाल राठौर, लेखपाल मनोज कुमार आरोपी बनाया गया है। यामीन काश्तकार ही नहीं, भूरा गांव में राशन का अधिकृत विक्रेता है। खाद्य एवं रसद विभाग के ई चालान फार्म में वह प्रतिमाह राशन सामग्री क्रय कर बैंक एकाउंट के माध्यम से भुगतान कर रहा है।
यामीन का कहना है कि तहसील कर्मचारियों को उसके जिंदा होने की पूर्ण जानकारी थी। बावजूद इसके मिलीभगत कर भूमि बेटे के नाम मृतक दर्शाकर चढ़ा दी।

0 comments:
Post a Comment