अगर आपको अपने नवजात शिशु को स्वस्थ रखने के लिए उसे भविष्य में होने वाली बीमारियों के बारे में पता लगाना है, तो उसकी कुंडली खंगालिए। कुंडलियों में बैठे ग्रह और नक्षत्र न केवल बच्चे को होने वाली बीमारियों के बारे में सटीक जानकारी देंगे। बल्कि, यह भी बता देंगे कि उसे कौन सी बीमारी कब और किस आयु में होगी।
1500 लोगों की कुंडलियों पर किया अध्ययन
यह सुनने या पढ़ने में विश्वास होना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन कुंडलियों पर हुए शोध में यह सच साबित हुआ है। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान भोपाल के शोधार्थी भूपेंद्र पाण्डेय ने ज्योतिष से रोगों के निदान और समाधान पर शोध किया है। इस शोध के लिए उन्होंने देश व विदेश के ऐसे करीब 1500 लोगों की कुंडलियों पर अध्ययन किया है। ये लोग पेट, हृदय, ब्लड प्रेशर, डायबिटिक और चर्म रोग जैसी बीमारियों से ग्रस्त थे।
यह सुनने या पढ़ने में विश्वास होना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन कुंडलियों पर हुए शोध में यह सच साबित हुआ है। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान भोपाल के शोधार्थी भूपेंद्र पाण्डेय ने ज्योतिष से रोगों के निदान और समाधान पर शोध किया है। इस शोध के लिए उन्होंने देश व विदेश के ऐसे करीब 1500 लोगों की कुंडलियों पर अध्ययन किया है। ये लोग पेट, हृदय, ब्लड प्रेशर, डायबिटिक और चर्म रोग जैसी बीमारियों से ग्रस्त थे।
बीमारी से संबंधित 100-100 कुंडलियों का किया अध्ययन
प्रत्येक बीमारी से संबंधित 100-100 कुंडलियों का अध्ययन किया गया। इनमें ग्रहों व नक्षत्रों की दशा के अनुसार रोगों में समानता मिली है। इन कुंडलियों का अध्ययन जब ज्योतिष और आयुर्वेद के ज्ञान को मिलाकर किया गया तो चौंकाने वाली जानकारियां सामने आयीं।
शोध से लगाया पता बीमारी साध्य थी या असाध्य
कुंडलियों में बैठे ग्रहों की स्थितियां उन पर दूसरे ग्रहों की दृष्टि, उन ग्रहों का बल व स्वभाव, ग्रहों का नक्षत्रों में संचार व वेध और ग्रहों की दशा व दिशा। इससे यह पता लगाया गया कि बीमार व्यक्ति किस रोग से कब से पीड़ित था। यह भी पता चला है कि बीमारी साध्य थी या असाध्य। इस शोध की सफलता के बाद अब कुंडलियों के आधार पर बाकी अन्य रोगों की भी पहचान के लिए अध्ययन किया जा रहा है।
आयुर्वेद और ज्योतिष का आपस में गहरा संबंध
डॉ. भूपेंद्र पाण्डेय के अनुसार आयुर्वेद और ज्योतिष का आपस में गहरा संबंध है। प्राचीन ग्रंथों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि जो भी चिकित्सक आयुर्वेद पद्धति से इलाज करता था उसे ज्योतिष का भी अच्छा ज्ञान होता था। चरक, सुश्रुत, अत्रि आदि आयुर्वेद के आचार्य सभी ज्योतिष शास्त्र में भी पारंगत थे। वे महर्षि इलाज के लिए औषधि लेन, दवा बनाने और मरीज को दवा देने तक के लिए मुहूर्त और ग्रह नक्षत्रों की स्थितियां देखते थे। मुहूर्त का तात्पर्य यहां समय से है। इसीलिए वे आचार्य चिकित्सा कार्य में अत्यंत दक्ष होते थे और रोगी के रोग का इलाज भी सटीक हुआ करता था। साथ ही वे आचार्य चिकित्सक के भी वर्तमान गृह नक्षत्रों की स्थिति की जानकारी रखने के लिए आदेश देते हैं।
डॉ. भूपेंद्र पाण्डेय के अनुसार आयुर्वेद और ज्योतिष का आपस में गहरा संबंध है। प्राचीन ग्रंथों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि जो भी चिकित्सक आयुर्वेद पद्धति से इलाज करता था उसे ज्योतिष का भी अच्छा ज्ञान होता था। चरक, सुश्रुत, अत्रि आदि आयुर्वेद के आचार्य सभी ज्योतिष शास्त्र में भी पारंगत थे। वे महर्षि इलाज के लिए औषधि लेन, दवा बनाने और मरीज को दवा देने तक के लिए मुहूर्त और ग्रह नक्षत्रों की स्थितियां देखते थे। मुहूर्त का तात्पर्य यहां समय से है। इसीलिए वे आचार्य चिकित्सा कार्य में अत्यंत दक्ष होते थे और रोगी के रोग का इलाज भी सटीक हुआ करता था। साथ ही वे आचार्य चिकित्सक के भी वर्तमान गृह नक्षत्रों की स्थिति की जानकारी रखने के लिए आदेश देते हैं।
उपचार
डॉ. भूपेंद्र पाण्डेय का कहना है कि रोगों के उपचार के लिए मरीज को मंत्र, दान, व्रत, औषधियों का सेवन या स्नान और रत्नों या औषधियों का धारण करने के सुझाव दिए जाते हैं। जिनको धारण या सेवन करने से चिकित्सक के द्वारा दी जा रही औषधियों का प्रभाव तुरंत होता है।
डॉ. भूपेंद्र पाण्डेय का कहना है कि रोगों के उपचार के लिए मरीज को मंत्र, दान, व्रत, औषधियों का सेवन या स्नान और रत्नों या औषधियों का धारण करने के सुझाव दिए जाते हैं। जिनको धारण या सेवन करने से चिकित्सक के द्वारा दी जा रही औषधियों का प्रभाव तुरंत होता है।
ग्रह व नक्षत्रों से रोग
सभी ग्रह व नक्षत्र शरीर के अंगों व उनमें होने वाली बीमारियों की सूचना देते हैं जैसे पेट के रोग के लिए चन्द्र व हृदय के लिए सूर्य आदि है। ये ग्रह जब पाप ग्रहों से प्रभावित होते है या कमजोर होते हैं तब रोग की उत्पत्ति उस रोगकारक ग्रह की दशा में पाई जाती है।
सभी ग्रह व नक्षत्र शरीर के अंगों व उनमें होने वाली बीमारियों की सूचना देते हैं जैसे पेट के रोग के लिए चन्द्र व हृदय के लिए सूर्य आदि है। ये ग्रह जब पाप ग्रहों से प्रभावित होते है या कमजोर होते हैं तब रोग की उत्पत्ति उस रोगकारक ग्रह की दशा में पाई जाती है।

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