हरियाणा में जाट आंदोलन शुरू होने से कई ज़िलों में तनाव बना हुआ है. एक तरह
से हरियाणा की नाकेबंदी हो गई है. रास्ते बंद होने की वजह से रोहतक में हेलीकॉप्टर
के ज़रिए फ़ौज को उतारा गया है.
आरक्षण की मांग को लेकर
हो रहे जाटों के इस आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में अब तक तीन लोग मारे गए हैं और
78 ज़ख्मी हुए हैं.
उधर, झज्जर शहर में सभी
दुकानें बंद हैं और रोहतक हाईवे पर ट्रकों की लंबी कतार लगी है. सोनीपत में भी जाम
के हालात हैं.
सड़कों पर प्रदर्शनकारी
बैठे हैं और वहां भी रोहतक हिंसा का असर देखा जा रहा है. आंदोलनकारियों ने अपने
साथियों से रोहतक जाने और वहां आंदोलनकारियों का साथ देने का आह्वान किया है.
अखिल भारतीय जाट आरक्षण
समिति के लोग भी धरनास्थल पर नज़र नहीं आ रहे है.
उनके हाथ से आंदोलन
निकलकर नौजवान आंदोलनकारियों के हाथों में चला गया है. बताया जाता है कि इसके चलते
सरकार और सुरक्षाबलों को उनसे बात करने और समझाने-बुझाने में परेशानी हो रही है.
अखिल भारतीय जाट आरक्षण
समिति ने 21 फरवरी से आंदोलन का ऐलान किया था मगर यह 14 फरवरी से ही शुरू हो गया
क्योंकि उस दिन हरियाणा में कई खाप पंचायतें की बैठकें हुई थीं और इसके बाद लोग
सड़कों पर उतर आए.
रोहतक रोड पर
आंदोलनकारियों ने आड़े-तिरछे ट्रक लगा रखे हैं और इनमें से कई की हवा निकाल दी है.
प्रदर्शनकारी काफी उग्र हैं. उनमें से कई के हाथों में लाठी-डंडे हैं और रह-रहकर
नारेबाज़ी चल रही है.
झज्जर में यातायात और
लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद है. झज्जर के पास कई ट्रक गुरुवार से फंसे हुए हैं.
कुछ ड्राइवरों ने बीबीसी को बताया कि उन्हें डर है कि हिंसा भड़की तो कहीं उनके
ट्रकों को निशाना न बनाया जाए. उनके वाहनों की कोई सुरक्षा नहीं जा रही है.
झज्जर में एक मंत्री के
घर पर हमला हुआ है. पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ भी आंदोलनकारियों की झड़पें हुईं
हैं, हालांकि किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है.
इससे पहले रोहतक में एक
पेट्रोल पंप और पुलिस स्टेशन पर लोगों ने आग लगा दी थी. जींद में रेलवे स्टेशन पर
पेट्रोल बम फेंका गया था जिससे स्टेशन के एक सेक्शन में आग लग गई थी.
हरियाणा पुलिस का कहना
है कि आग पर फौरन क़ाबू पा लिया गया. झज्जर शहर के अंदर सुरक्षा बल और फ़ौज फ़्लैग
मार्च कर रहे हैं.
रोहतक में हुई हिंसा को
लेकर स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस तमाशबीन बनी रही और कोई मदद के लिए नहीं
आया. इसकी वजह यह बताई जा रही है कि भीड़ बहुत ज़्यादा उद्वेलित थी और उस पर क़ाबू
पाना मुश्किल था.
उधर, गैर जाट लोगों का
कहना है कि राजनीतिक परिणामों को देखते हुए सुरक्षा बलों को कोई भी कार्रवाई करने
से मना किया गया है. उनका आरोप है कि इसी वजह से इस आंदोलन के बावजूद सरकार कोई
ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने लोगों से शांति बनाए रखने और आगज़नी या हिंसा न करने की
अपील की है.
मौजूदा मुख्यमंत्री
मनोहरलाल खट्टर ने भी कहा है कि उनकी बातों पर विचार किया जा सकता है. मगर
आंदोलनकारियों का कहना
है कि जब तक उन्हें आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक वो सड़कों से नहीं हटेंगे.
आंदोलनकारियों का कहना
है कि सरकार ने उनके साथ धोखा किया है.
उनके मुताबिक़ सरकार ने
छह महीने पहले कहा था कि वह आरक्षण देगी, लेकिन उसके बाद उन्होंने आर्थिक रूप से
कमज़ोर वर्ग को आरक्षण देने की बात की.
जाट आंदोलनकारी कह रहे
हैं कि उन्हें ओबीसी से नीचे कोई स्टेटस मंज़ूर नहीं है.
उधर, शनिवार बीजेपी
सांसद राजकुमार सैनी ने कहा था कि अगर ओबीसी कोटे के लिए निर्धारित आरक्षण में
कटौती करके उसे जाटों को दिया गया तो वह इस्तीफ़ा भी दे सकते हैं. इसके बाद उन्हें
कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

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