क्यूबा- थिरककर फिट रहते हैं
क्यूबा के लोगों का म्यूजिक और खासतौर से डांस से गहरा लगाव है। यहां ‘रूम्बा’ व ‘ज़ुम्बा’ डांस बहुत फेमस है, जिनमें कमर को घुमाना खास होता है। ये एक तरह की एक्सरसाइज है।यहां के लोग केवल पार्टी या शादी में नहीं नाचते, बल्कि हर दिन, अपने घर में इस एक्सरसाइज को करते हुए भी थिरकते हैं। सीधी-सी बात है, एनर्जी से भरे इस डांस को रोजाना करने से काफी सारी कैलोरीज बर्न होती है।
फ़ायदे- किसी भी तरह का डांस करने से बॉडी का लचीलापन बना रहता है और वह एनर्जेटिक बनी रहती है। हार्ट के साथ ही बोन्स भी हेल्दी रहती हैं और मोटापा भी कम होता है। बॉडी के काम करने की स्टैमिना भी बनी रहती है।
नीदरलैंड्स- सायकिल चलाते हैं
डच लोग अपना रोज का काम साइकिल से करते हैं, जो न केवल एन्वायरमेंट के लिए बेहतरीन है, बल्कि हेल्थ के लिए भी असरदार है। यहां के लोग खरीदारी करने से लेकर दफ़्तर जाने, घूमने और आसपास के काम निबटाने के लिए साइकिल का ही सहारा लेते हैं। यहां के मशहूर शहर एम्सटर्डम की आधी से ज्य़ादा आबादी हर रोज साइकिल का इस्तेमाल करती है और 85 प्रतिशत लोग हफ़्ते में एक बार जरूर साइकिल चलाते हैं। स्वच्छ हवा में साइकिल चलाने से बॉडी की एक्टिविटी बनी रहती है और साथ ही पॉजीटिव असर भी दिखाई देते हैं।
फयदे- सायकिल चलाने से स्टैमिना बढ़ती है। दिमाग़ तरोताज़ा और तनाव कम होता है। सायक्लिंग सही तरह से की जाए, तो पसीने छुड़ा देती है, जो वज़न घटाने में मददगार है।
सिंगापुर- पत्थरों पर चलते हैं सिंगापुर, मलेशिया और ताइवान के कई मॉडर्न इलाको में गोल-चिकने पत्थरों से बनी सड़कें नज़र आ जाती हैं। न केवल पार्क में, बल्कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स व रहने वाले इलाको में भी इसे बनाया जाने लगा है। इसके पीछे केवल एक ही मकसद था- लोग ज्यादा से ज्यादा सड़कों पर नंगे पैर सैर करें। यह ‘रिफ्लेक्सोलॉजी’ पर बेस्ड है, जिसमें पैरों के अलग-अलग हिस्सों (जो शरीर के विभिन्न हिस्सों से जुड़े हुए हैं) पर ज़ोर देकर इलाज किया जाता है। पहली-दूसरी बार इस तरह नंगे पैर रास्तों पर चलना अजीब लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत होने लगती है। आप चाहें, तो नदी या समुद्र किनारे अथवा बग़ीचे में लगे ऐसे पत्थरों पर भी नंगे पैर चल सकते हैं।
फ़ायदे- नंगे पैर ऐसी सड़क या बग़ीचे में टहलने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है। यह तलवों व पैरों को शक्ति भी प्रदान करता है।
जापान- काम से पहले व्यायाम करते हैं
जापान के दफ़्तरों में काम की शुरुआत एक मधुर पियानो ध्वनि से होती है, जिस पर सभी कर्मी स्ट्रैचिंग करते हैं। कर्मियों को एनर्जेटिक बनाए रखकर बेहतर परफॉर्मेंस के लिए प्रेरित किया जाता है। उन्होंने पाया कि लोगों में सबसे कम अवेयरनेस अपने हेल्थ और फिटनेस को लेकर होता है। सुबह जल्दी काम पर आना और देर तक दफ़्तर में ही रहना फिटनेस के लिए सही नहीं होता। इसलिए उन्होंने काम पर ही स्ट्रैचिंग करने का नियम लागू कर दिया। तरक़ीब काम कर गई और सारे देश में इसे अपनाया जाने लगा। अब जापान का राष्ट्रीय रेडियो स्टेशन हर सुबह 15 मिनट की धुन बजाता है, जिस पर सभी कर्मियों को उठकर स्ट्रैचिंग करनी होती है। ‘रेडियो एक्सरसाइज़’ के नाम से बजने वाली यह धुन अब हर घर, पार्क, स्कूल, कॉलेज व दफ़्तर में रोज़ सुबह सुनी जाती है और लोग सबकुछ छोड़कर शुरू हो जाते हैं।
फायदे- स्ट्रैचिंग करने से शरीर में लचीलापन आता है और मसल्स में सही तरीके से ब्लड सर्कुलेशन होता है, जिससे थकान दूर होती है और एनर्जी मिलती है।

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